सामने वाले के प्रभामंडल को कैसे जाने?

सामने वाले के प्रभामंडल को यानी औरा को देखकर उसके स्वभाव को कैसे जाने? हमारे शरीर के अंदर अलौकिक शक्तियो का खजाना भरा पडा है. प्रभामंडल हमारे ब्यक्तित्व की पहचान है. यह हमारे ब्यक्तित्व को दर्शाता है. ब्यक्ति के चेहरे के चारो तरफ उर्जा या प्रभामंडल जितनी घनी व बडी होगी उतनी उतना ही आपका ब्यक्तित्व प्रभावशाली होता है.  जब प्रभामंडल बढता है तब चेहरे पर चमक आ जाती है. हमारे विचारो के आधार पर ही प्रभामंडल कम ज्यादा होता है. निगेटिव विचार करने पर यानी नकारात्मक विचार करने परRead More


कुंडलिनी मे खेचरी मुद्रा

कुंडलिनी मे खेचरी मुद्रा द्वारा अमृत रसपान हमारे शरीर के अंदर अलौकिक शक्तियो का खजाना भरा पडा है. इस शक्ति को जानने के लिये हमे अपने शरीर के अंदर की गुप्त क्रिया को समझना होगा. जैसा कि मैने “‘ कुंडलिनी और ब्रम्हचर्य’ के दूसरे भाग मे सप्तधातु के बारे मे बताया था कि कैसे हम अपनी सप्तधातु को तेज मे या प्रभामंडल मे कैसे बदले. शरीर मे जब सप्तधातु का क्षय होने लगता है तब ओज और तेज का निर्माण रुक जाता है. जिस तरह से मलाई से घी तैयारRead More


Kundalini dhyan aur bramhacharya-2

कुंडलिनी ध्यान और ब्रम्हचर्य भाग २ कुंडलिनी ध्यान और ब्रम्हचर्य भाग २ मे….. ब्रह्मचर्य मे आने वाली अडचने और उसका समाधान. इस विषय को समझने के लिये शरीर की कुछ क्रिया को समझना होगा. जैसे कि हम जब भोजन करते है तब उसका रस, रक्त, मांस, मेद यानी चर्बी, अस्थि यानी हड्डी, मजा यानी हड्डी के बीच का मांस और बाद मे शुक्र वीर्य तैयार होता है. भोजन करने से लेकर सप्तधातु तैयार होने तक २८ दिन का समय लगता है. खाना हम रोज खाते है इससे बच्चे के पैदा होने से लेकर १३-१४ वर्षRead More


Kundalini dhyan aur branhacharya-1

कुंडलिनी ध्यान और ब्रम्हचर्य-1 कुंडलिनी एक जटिल क्रिया है इसमे एक लाख की तुलना मे १ हजार के करीब लोग सफलता प्राप्त करते है. इसका मतलब यह नही है कि बाकी के लोग सफल नही होते.  लाभ उन्हे भी मिलता है सिर्फ सहस्त्रार चक्र तक नही पहुच पाते.  क्योकि वे ब्रम्हचर्य का सही ठंग से पालन नही कर पाते. हमारे ऋषियों का कहना है कि मानव का ब्रह्मचर्य परमात्मा के दर्शन का द्वार है,  अगर आप जीवन मे कुछ पाना चाहते है  ब्रह्मचर्य का पालन अवश्य करना चाहिये. हिंदू धर्मRead More


Vat savitri vrat

वट सावित्री व्रत आज हम बात करेगें वट सावित्री के दिन कौन से उपाय करे की हमारी सभी मनोकामना पूर्ण हो जाय.  ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की पुर्णिमा को वट साविती व्रत मनाया जाता है. यह सुहागिन स्त्रियो का त्योहार माना जाता है. इस व्रत को वट पूर्णिमा या सावित्री व्रत के नाम से भी जाना जाता है. हमारे भारतीय संकृति मे यह आदर्श नारी का प्रतीक दिन बन गया है. शास्त्र के अनुसार अनुसार ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को यह व्रत करने का विधान है स्त्रियो केRead More


Matangi Antar Tratak

मातंगी अंतर त्राटक माता मातंगी दस महाविद्या मे ९वी महाविद्या मानी जाती है. इन्हे स्तम्भन की देवी भी कहा जाता है. इनके अलग अलग नाम है जैसे सुमुखी, लघुश्यामा या श्यामला, उच्छिष्ट-चांडालिनी, उच्छिष्ट-मातंगी, राज-मातंगी, कर्ण-मातंगी, चंड-मातंगी, वश्य-मातंगी, मातंगेश्वरी, ज्येष्ठ-मातंगी, सारिकांबा, रत्नांबा मातंगी, वर्ताली मातंगी. मतंग भगवान शिव का ही नाम है। इनकी शक्ति मातंगी है। सॉवला रंग तथा मस्तक पर चंद्रमा को धारण करने वाली माता मातंगी वाग्देवी का ही रूप है. ये आकर्षण व स्तंभन की स्वामिनी मानी जाती है. जो ब्यक्ति मातंगी महाविद्या की सिद्धी प्राप्त करता है,Read More


बिमारी का रहस्य

हम हमेशा बिमार क्यो होते है सामान्य रूप से ब्यक्ति बिमार ४ कारणो की वजह से होता है. और व्यक्ति जितना ही इन कारणो को अपने से दूर रखेगा उतना ही वह बिमारियो से बचा रहेगा. इसमे पहला कारण है भोजन. २५% बिमारिया गलत भोजन लेने की वजह से होती है. जैसे… जरूरत से ज्यादा भोजन करना भोजन मे स्वादिष्ट चीजो का अधिक मात्रा मे उपयोग करना तला हुआ पदार्थ का सेवन अधिक करना अपने भोजन मे मिर्च-मसालो का उपयोग अधिक करना अपने भोजन मे सलाद, फल, हरी सब्जी काRead More


Agni Tatva Dhyan

अग्नि तत्व ध्यान आज हम अग्नि तत्व ध्यान के बारे मे जानेंगे. तथा यह जानने की कोशिश करेगे कि ज्यादा से ज्यादा अग्नि तत्व ध्यान का लाभ कैसे उठाये. मनुष्य का शरीर ५ तत्वो से मिलकर बना है इन्ही ५ तत्व का ध्यान मनुष्य को सफलता ऊचाइयो तक पहुचा देता है.  लेकिन आज हम इन ५ तत्व मे से अग्नि तत्व ध्यान की बात करेंगे. अग्नि तत्व का स्थान मणीपुर चक्र पर होता है मणिपुर चक्र को ही सूर्य चक्र या सोलार चक्र कहा जाता है. और संपूर्ण सृष्टी काRead More


Jal Tatva Dhyan

जल तत्व ध्यान मनुष्य का शरीर ५ तत्वो से मिलकर बना है इन्ही ५ तत्व का ध्यान मनुष्य को सफलता ऊचाइयो तक पहुचा देता है.  लेकिन आज हम इन ५ तत्व मे से जल तत्व ध्यान की बात करेंगे. पृथ्वी तत्व  ध्यान के बाद जल तत्व ध्यान करना चाहिये. या फिर सीधे जल तत्व ध्यान कर सकते है.  जल तत्व का स्थान स्वाधिष्ठना चक्र मे माना जाता है.  हमारी जीभ को स्वाद इसी तत्व की वजह से आता है. बिमारी मे जल तत्व का संतुलन बिगड जाता है जिससे मुहRead More


Prathvi Tatva Dhyan

पृथ्वी तत्व ध्यान आज हम पृथ्वी तत्व ध्यान के बारे मे जानेंगे. तथा यह जानने की कोशिश करेगे कि ज्यादा से ज्यादा पृथ्वी तत्व का लाभ कैसे उठाये. मनुष्य का शरीर ५ तत्वो से मिलकर बना है इन्ही ५ तत्व का ध्यान मनुष्य को सफलता ऊचाइयो तक पहुचा देता है.  लेकिन आज हम इन ५ तत्व मे से पृथ्वी तत्व ध्यान की बात करेंगे. पृथ्वी तत्व की वजह से ही चुंबकीय शक्ति का विकास होता है. क्योकि पूरी सृष्टी आकर्षण से प्रभावित होती रहती है। पृथ्वी के उत्तर-दक्षिण दिशा मेंRead More