Vat savitri vrat

वट सावित्री व्रत

आज हम बात करेगें वट सावित्री के दिन कौन से उपाय करे की हमारी सभी मनोकामना पूर्ण हो जाय.  ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की पुर्णिमा को वट साविती व्रत मनाया जाता है. यह सुहागिन स्त्रियो का त्योहार माना जाता है. इस व्रत को वट पूर्णिमा या सावित्री व्रत के नाम से भी जाना जाता है. हमारे भारतीय संकृति मे यह आदर्श नारी का प्रतीक दिन बन गया है. शास्त्र के अनुसार अनुसार ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को यह व्रत करने का विधान है स्त्रियो के लिये यह व्रत सौभाग्य व संतान प्राप्ती वाला दिन माना जाता है. सावित्री का अर्थ वेद माता गायत्री और सरस्वती भी होता है.

एक कथा के अनुसार भद्र देश के राजा अश्वपति के कोई संतान नही थी. उन्होंने संतान की प्राप्ति के अठारह वर्षों तक तपस्या की. तब सावित्री देवी ने प्रकट होकर वर दिया कि ‘तुम्हे एक तेजस्वी कन्या पैदा होगी. माता सावित्री की कृपा से जन्म लेने की वजह से इस कन्या का नाम सावित्री रखा गया.

कन्या बड़ी होकर बेहद रूपवान थी. उसके लिये योग्य वर न मिलने की वजह से सावित्री के पिता दुःखी रहा करते थे.  उन्होंने सावित्री को स्वयं अपना वर चुनने के लिये कहा.  सावित्री तपोवन में भटकने लगी. तब सावित्री ने साल्व देश के राजकुमार सत्यवान जिनका राज्य छीन लिया गया था, से विवाह कर लिया. सत्यवान अल्पायु थे इसलिये नारद ने भी उन्हे विवाह के लिये मना किया थे लेकिन सावित्री की जिद पर सत्यवान को विवाह करना पडा. आगे चलकर अपनी पतिव्रता शक्ति के आधार पर ही सावित्री ने अपने पति को मौत के मुह से वापस ले आयी.

इस दिन व्रत करने पर अनेको लाभ मिलते है जैसे…

  • पति की आयु बढती है

  • पति-पत्नी की बिमारियो से बचाव होता है

  • वैवाहिक जीवन सुखमय रहता है

  • संतान योग बढ जाते है

  • संतान की बुद्धि तेज होती है

  • पति की नौकरी ब्यापार मे बढोतरी होती है

इस दिन स्त्रिया बरगद की पूजा करती है इसे वट भी कहते है. भगवान बुद्ध को भी बरगद के पेड के नीचे ज्ञान की प्राप्ती हुयी थी. कहते है कि सब पेडो की एक उम्र होती है जैसे किसी की ४० साल तो किसी की ८० साल तो किसी की १०० साल. लेकिन बरगद के पेड की उम्र आज तक कोई भी नही बता पाया.  पूरी दुनिया मे २०० से ३००० वर्ष पुराने पेड भी पाये गये है. वैज्ञानिको के अनुसार इस पेड मे जीवनी शक्ति यानी प्राणशक्ति बहुत ही ज्यादा पायी जाती है.

आइये अब जानते है कि स्त्रिया इस दिन का लाभ कैसे उठाये…

  • इस दिन बरगद मे धागा बाधकर सात फेरे लगाये और बेल पत्र अर्पण करे तो घर परिवार सुखी रहता है. पति की लंबी आयु होती है.

  • इस दिन बरगद मे धागा बांधकर सात फेरे लगाये और तुलसी के पत्ते अर्पण करे तो पति का आकर्षण पत्नि के प्रति बढ जाता है. तथा पति दिर्घायु होता है.

  • इस दिन बरगद मे धागा बाधकर सात फेरे लगाये और हल्दी का टुकडा अर्पण करे तो व्यव्साय से संबंधित विशेष कार्य मे सफलता मिलती है.तथा पति दिर्घायु होता है.

  • इस दिन २७०० ग्राम यानी २ किलो ७०० ग्राम चावल निकाल कर अलग बरतन मे रख दे, उसमे से १ मुट्ठी चावल व एक हल्दी का टुकडा लेकर  बरगद के पेड मे धागा बाधकर सात फेरे लगाये और चावल व हल्दी का टुकडा अर्पण करे और घर आकर उसी चावल मे से १०० ग्राम के करीब चावल निकाले और रात के भोजन मे उसका का खीर बनाकर  पति-पत्नी सेवन करे. इस तरह से २७ दिन तक रात के भोजन मे पति-पत्नी खीर का सेवन करे. तो संतान योग प्रबल हो जाते है.

आशा है कि यह उपाय आपके लिये लाभकारी सिद्ध होगा

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