कुंडलिनी मे खेचरी मुद्रा

कुंडलिनी मे खेचरी मुद्रा द्वारा अमृत रसपान

हमारे शरीर के अंदर अलौकिक शक्तियो का खजाना भरा पडा है. इस शक्ति को जानने के लिये हमे अपने शरीर के अंदर की गुप्त क्रिया को समझना होगा. जैसा कि मैने “‘ कुंडलिनी और ब्रम्हचर्य’ के दूसरे भाग मे सप्तधातु के बारे मे बताया था कि कैसे हम अपनी सप्तधातु को तेज मे या प्रभामंडल मे कैसे बदले. शरीर मे जब सप्तधातु का क्षय होने लगता है तब ओज और तेज का निर्माण रुक जाता है. जिस तरह से मलाई से घी तैयार होता है उसी तरह से वीर्य से ओज बनता है. यह रीढ के अंदर के द्रव मे मिल जाता है और तेज शरीर के बाहर आना शुरु हो जाता है जिसे हम प्रभामंडल भी कहते है. यह चेहरे के चारो तरफ फैल जाता है.

रीढ की हड्डी मे कई कोशिकाये मिलकर एक नली का निर्माण करती है. और ये नली मूलाधार चक्र से लेकर मस्तिष्क तक जाती है. इनमे ३  विशेष नाडिया होती है, जिसे हम इडा नाडी, पिंगला नाडी और सुशुम्ना नाडी कहते है. ओज सुशुम्ना नाडी से होकर ही मस्तिष्क तक पहुचता है. आप किसी भी प्रकार का मानसिक कार्य करते है तो उससे मस्तिष्क गर्म हो जाता है. तो यही ओज ही गर्म मस्तिष्क को ठंडा करने का कार्य करता है. अगर ये कम मात्रा मे हो तो मस्तिष्क मे गर्मी बनी रहती है तथा चिडचिडापन, बात-बात मे गुस्सा करना, छोटी=छोटी बातो पर लडना, पागलपन यानी मस्तिष्क की पूरी ब्यवस्था गडबडा जाती है. अगर यही ओज पर्याप्त मात्रा मे मिलता रहे तो मस्तक पर चमक दिखाई देने लगता है.

जब मस्तिष्क मे ओज की मात्रा बढ जाती है तो गले के तालू मे ओज रस बूंद बूंद ट्पकने लगता है इसे ही अमृत रस कहा गया है. आज तक इसके स्वाद का अनुभव दुनिया मे कोई नही बता पाया. यह एक अलौकिक अनुभव होता है. ये अनुभव बोलकर या लिखकर बताया नही जा सकता है. इसी अनुभव को प्राप्त करने के लिये खेचरी मुद्रा अपनानी होती है. खेचरी मुद्रा द्वारा जीभ जब तालू मे टपकने वाले ओज रस को स्पर्श कर लेती है तब शरीर मे तेज बढ जाता है, आज्ञा चक्र खुलने की प्रक्रिया शुरु हो जाती है. एक अलौकिक अहसास होना शुरु हो जाता है. और ये सब खेचरी मुद्रा के द्वारा ही प्राप्त होता है. इसलिये कहा जाता है कुंडलिनी अभ्यास साथ ही खेचरी मुद्रा का अभ्यास भी करते रहना चाहिये. इस अभ्यास मे मुह बंद करे फिर दातो को दबा ले और जीभ को ऊपर उठाकर तालू की ओर ले जाने का प्रयास करे. यही खेचरी मुद्रा है… इस खेचरी मुद्रा का अभ्यास नियमित करते रहना चाहिये.

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*