Kundalini dhyan aur branhacharya-1

कुंडलिनी ध्यान और ब्रम्हचर्य-1

कुंडलिनी एक जटिल क्रिया है इसमे एक लाख की तुलना मे १ हजार के करीब लोग सफलता प्राप्त करते है. इसका मतलब यह नही है कि बाकी के लोग सफल नही होते.  लाभ उन्हे भी मिलता है सिर्फ सहस्त्रार चक्र तक नही पहुच पाते.  क्योकि वे ब्रम्हचर्य का सही ठंग से पालन नही कर पाते. हमारे ऋषियों का कहना है कि मानव का ब्रह्मचर्य परमात्मा के दर्शन का द्वार है,  अगर आप जीवन मे कुछ पाना चाहते है  ब्रह्मचर्य का पालन अवश्य करना चाहिये.

हिंदू धर्म में ब्रह्मचर्य का अत्यधिक महत्व है। ब्रह्मचर्य को सभी तपों में प्रमुख तप कहा गया है। ब्रह्मचर्य हमारी आत्मिक शक्ति है। उपनिषद् में ब्रह्मचर्य के विषय में कहा गया है कि ब्रह्मचर्य के पालन का फल चारों वेदों के उपदेश के समान है। ब्रह्मचर्य अमरत्व प्रदान करने वाला है। अमर होने का अर्थ सिर्फ मृत्यु न होने से ही नही है अपितु कर्मो के द्वारा अपने नाम को अमर करने से भी है.

कुंडलिनी के बारे मे कहा गया है सही तरह से अभ्यास करने के पहले एक महीने तक ब्रम्हचर्य का पालन करना चाहिये. उसके बाद ही कुंडलिनी की शुरुवात करना चाहिये.

तो आइये अब जानते है कि कौन कौन से नियम का पालन करना चाहिये.

  •  ब्रह्मचर्य तन से अधिक मन पर आधारित होता है. इसलिए मन को नियंत्रण में रखकर अपने सामने ऊँचे आदर्श रखो.
  • दिन मे ५ मिनट अध्यात्मिक किताबे अवश्य पढो
  • अश्लील चित्र देखने से परहेज करो
  • अश्लील बाते सुनने से परहेज करो
  • एक कहावत है कि “जैसा खाये अन्न वैसा बने मन” इसलिये गरम मसाले, चटनियाँ, मिर्च-मसाले तथा मांस, मछली, अंडे, चाय कॉफी, फास्टफूड आदि का सेवन न करे.
  • मन को हमेशा कुछ न कुछ चाहिये. खाली समय मे मन मे हमेशा उल्टे-सीधे विचार आते रहते है इसलिये खाली समय के दौरान ईश्वर मे मन लगाये या अध्यात्मिक प्रवचन सुने,
  • साफ-सुथरे सूती या खादी वस्त्र पहनना चाहिये. सिंथेटिक वस्त्रो को पहनने से बचना चाहिये. खादी, सूती, ऊनी वस्त्रों से प्राणशक्ति की रक्षा होती है
  • प्रातः जल्दी उठने की आदत डालो क्योकि अंतिम प्रहर मे कामवासना बढ जाती है.
  • बदहज्मी व कब्ज से अपने आप को बचाओ
  • पान मसाला, गुटखा, सिगरेट, शराब, चरस, अफीम, भाँग आदि सभी मादक (नशीली) चीजें सप्त धातुओ को कमजोर करती हैं, इसलिये इन सब से दूर रहे.
  • रोज हल्का व्यायाम, योग या प्राणायाम अवश्य करे.

ब्रम्हचर्य से लाभ

  • ब्रम्हचर्य से शारीरिक, मानसिक व अध्यात्मिक शक्ति बढती है.
  • ब्रम्हचर्य से तेज बढता है
  • ब्रम्हचर्य से प्रसिद्धी, कीर्ति मिलती है

यहा एक पृश्न उठता है कि इस तरह की कुंडलिनी अभ्यास के लिये ब्रम्हचर्य की जरूरत होती है, तो क्या ग्रहस्थ ब्यक्ति इस अभ्यास को नही कर सकता. मै यहा यह कहना चाहता हु कि ग्रहस्थ स्त्री-पुरुष भी कुंडलिनी अभ्यास को कर सकते है.

कुंडलिनी अभ्यास के दौरान शरीर मे अल्फा तरंगे निकलती है जो आपके सप्तधातु को… औरा या तेज मे बदलने का काम करती है. अगर सप्तधातु कमजोर है तो अल्फा तरंगे निकलती तो है लेकिन ऊपर की तरफ सप्तधातु को खीच नही पाती. इससे ब्यक्ति मे गुस्सा, चि्डचिडापन बढ जाता है.

इसलिये ब्रम्हचर्य की जरूरत बढ जाती है. इसके लिये एक महीना ब्रम्हचर्य का पालन करे फिर कुंडलिनी का अभ्यास करे.

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