Agni Tatva Dhyan

अग्नि तत्व ध्यान

आज हम अग्नि तत्व ध्यान के बारे मे जानेंगे. तथा यह जानने की कोशिश करेगे कि ज्यादा से ज्यादा अग्नि तत्व ध्यान का लाभ कैसे उठाये.

मनुष्य का शरीर ५ तत्वो से मिलकर बना है इन्ही ५ तत्व का ध्यान मनुष्य को सफलता ऊचाइयो तक पहुचा देता है.  लेकिन आज हम इन ५ तत्व मे से अग्नि तत्व ध्यान की बात करेंगे.

अग्नि तत्व का स्थान मणीपुर चक्र पर होता है मणिपुर चक्र को ही सूर्य चक्र या सोलार चक्र कहा जाता है. और संपूर्ण सृष्टी का संचालन सूर्य  से ही होता है. क्योंकि सूर्य से मिलने वाली ऊर्जा शक्ति से ही मनुष्य का शरीर संचालित होता है. यह उर्जा मणिपुर चक्र से बाकी के चक्रो को प्राप्त होता है, अगर किसी कारण से मणिपुर चक्र का संतुलन बिगड जाये तो बाकी के चक्रो को उर्जा नही मिल पाती, जिसकी वजह वे चक्र भी सही ढंग से कार्य नही कर पाते और तब शरीर बिमार होने लगता है. मणिपुर चक्र जहा बिमारियो को रोकता है वही शरीर मे उर्जा पहुचाकर शरीर को निरोगी बनाये रखता है. इसी कारण से अग्न तत्व ध्यान महत्वपूर्ण माना जाता है,

अग्नि तत्व ध्यान के बहुत से लाभ मिलते है जैसे…

  • अग्नि तत्व ध्यान से हर तरह की सुरक्षा प्राप्त होती है
  • पूरे शरीर मे उर्जा का संचार होता है
  • सहन शक्ति बढती है
  • चेहरे पर चमक बढती है
  • अग्नि तत्व सिद्ध हो जाने पर भूख बढ जाती है

इसके अलावा आप कुछ समस्या का सामना कर रहे है तो अग्नि तत्व ध्यान अवश्य करना चाहिये. जैसे कि

  • स्वयं पर भरोसा न होना यानी आत्मविश्वास की कमी.
  • सही निर्णय न ले पाना
  • मधुमेह की समस्या
  • ब्लडप्रेशर की समस्या
  • शरीर मे सूजन
  • मानसिक समस्या
  • खट्टी डकारे आना
  • असुरक्षा की भावना
  • किसी अनहोनी का डर
  • डरावने सपने आना
  • चोरी, लूट-मार का डर
  • ब्लैकमैजिक या तंत्र बाधा की समस्या
  • भूत-प्रेत का डर
  • अकेले रहने पर डर लगना
  • अनजाना भय
  • हत्या का डर
  • बार-बार बिमार पडना पर कारण समझ मे न आना
  • किसी को अपने बारे मे बुरा कहते सुनाई देना
  • शरीर मे काले धब्बे दिखाई दे और कुछ दिन मे निकल जाये
  • बार-बार हादसे होते रहना
  • नजर लगना
  • चिडचिडापन
  • अचानक ही परिवार से या दूसरो से लडाई-झगडा करने लगना
  • बिमारी मे दवा का असर न हो पाना
  • जाने अंजाने आपका किसी वाद-विवाद होते रहना.

इनमे से आप किसी भी समस्या का सामना कर रहे है तो अग्नि तत्व ध्यान अवश्य करना चाहिये.

अब जानते है कि अग्नि तत्व ध्यान कैसे करे…

किसी भी शांत कमरे मे ढीले-ढाले वस्त्र पहनकर किसी भी आसन मे बैठ जाये. १० बार सामान्य प्राणायाम करे. यानी गहरी सांस ले और छोडे. इस तरह से दस बार करे. फिर २० बार अश्विनी या वज्रोली मुदा करे यानी २० बार गुदा को यानी मल विसर्जन स्थान को संकुचित करे व छोडे. इस तरह से २० बार करने के बाद मणिपुर चक्र स्थान पर ध्यान केन्द्रित करे. यह स्थान हृदय के नीचे तथा नाभी के ऊपर माना जाता है…..  ध्यान भटक जाये तो तुरंत १० बार अश्विनी या वज्रोली मुदा करे व फिर से मणिपुर चक्र पर ध्यान केन्द्रित करे. यह अभ्यास २-३ दिन तक करने से नाभी पर ध्यान लगना शुरु हो जाता है.  इस तरह से ध्यान  यह अभ्यास १० मिनट रोज करे. और कम से कम एक महीने तक रोज अभ्यास करे.   इस तरह से आप देखेंगे कि आपको आश्चर्यजनक परिणाम मिल रहे है.

अग्नि तत्व ध्यान के नियम..

  • अभ्यास मे पूरी श्रद्धा रखे
  • इस अभ्यास को स्त्री-पुरुष जो १६ वर्ष के ऊपर हो कर सकते है
  • इस अभ्यास को सुबह करना अच्छा माना जाता है लेकिन शाम को भी कर सकते है
  • मांसाहार-शराब या किसी भी प्रकार का ब्यसन नही करना चाहिये
  • तेन-्मिर्च-्मसालो का अपने भोजन प्रयोग कम करे
  • इस अभ्यास मे कभी कभी बहुत पसीना आता है या बार बार बाथरूम जाना पड सकता है या कभी कभी सर्दी-जुखाम होना शुरु हो जाता है अगर ऐसा होता है तो घबराये नही आपका शरीर आपके अंदर की खराबी को निकाल रहा है. अगर ऐसा नही हो रहा है तो कोई बात नही.
  • महिलाये मासिक धर्म मे ३-४ दिन का गैप करने के बाद फिर कंटीन्यू कर सकती है.

  • अभ्यास की अवधि मे ब्रम्हचर्य रहना अनिवार्य है

  • अभ्यास समाप्त होने के बाद अश्विनी या वज्रोली मुद्रा अवश्य अपनाये. यह मुद्रा आपको ब्रह्मचर्य का पालन करने मे मदत करती है.  अश्विनी या वज्रोली मुद्रा क्या है व इसका अभ्यास कैसे करे, यह जानने के लिये नीचे डिस्क्रिप्शन मे लिंक दिया गया है, आप देख सकते है.

  • पति-पत्नि हफ्ते मे एक बार संबंध रख सकते है.

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