Durga manas dhyan

दुर्गा मानस ध्यान

आज हम बात करेंगे दुर्गा मानस ध्यान की. पुराणो के अनुसार माता दुर्गा को धर्म की देवी होने की वजह से आदिशक्ति माना गया है. ये शांती समृद्धी, धर्म तथा परिवार को नुकसान पहुचाने वाली शक्तियो का विनाश करती है. यही कारण है कि इस कलियुग मे माता दुर्गा की विशेष रूप से पूजा- साधना की जाती है. इनकी उत्पत्ति राक्षसो का विनाश करने के लिये देवताओ के आग्रह पर किया गया था. इसलिये इन्हे युद्ध की देवी भी कहा जाता है. इनकी पूजा साधना करने सभी नवदुर्गाओ की पूजा का फल मिलता है.

जिन लोगो को दुर्गा साधना करने मे रुचि नही है या वे साधना से संबंधित जटिल क्रियाओ से बचना चाहते है उन्हे दुर्गा मानस ध्यान या दुर्गा अंतर त्राटक करने मे आसानी होगी.

अब हम बात करेगे दुर्गा मानस ध्यान के लाभ की.

  • हर तरह के भय से मुक्ति मिलती है.

  • पारिवारिक जीवन अडचने दूर होती है

  • शत्रुओ द्वारा आपके परिवार पर किया गया षडयंत्र सफल नही होता

  • विवाहित जीवन सुखमय रहता है

  • मन-पसंद वर की प्राप्ती होती है.

  • बच्चो मे अच्छे संस्कार विकसित होते है.

  • भौतिक रूप से सफलता मिलती है

  • विवाहित जीवन की कठिन से कठिन समस्या का निवारण हो जाता है.

  • माता दुर्गा की कृपा आप पर बनी रहती है.

अब जानते है कि दुर्गा अंतर त्राटक या दुर्गा मानस ध्यान कैसे करे.

एक शांत कमरे का चुनाव करे. दरवाजे की घंटी, मोबाईल फोन को बंद कर दे ढीले-ढाले वस्त्र पहने. एक कुर्सी पर या, जमीन पर आसन बिछाकर बैठ जाय.  अपने ठीक सामने माता दुर्गा की मुर्ती या फोटो को रखे. अब अपने आज्ञा चक्र को पिंच करे और दुर्गा मन्त्र “ॐ दुं दुर्गाये नमः” का उचारण १ मिनट तक करे.  अब एकटक कुछ सेकेंड उस चित्र या मुर्ती को देखते रहे. और आख बंद कर ले, और उस मुर्ती को या चित्र को अपने आखो के सामने लाने का प्रयास करे. आप देखेंगे कि कुछ सेकेंड के लिये वह चित्र या मुर्ती आपके आखो के सामने दिखाई देगी, फिर गायब हो जायेगी. पहले दिन यह अभ्यास ५-६ मिनट तक करना है.

अब दूसरे दिन पुनः निश्चित समय पर अभ्यास शुरु करे. अब अपने दोनो आखो के बीच यानी आज्ञा चक्र पर पिंच करे और १ मिनट तक दुर्गा मन्त्र “ॐ दुं दुर्गाये नमः” का उच्चारण करे.. अब उस चित्र को या मुर्ती को अपने आखो के सामने लाने का पुनः अभ्यास करे….

इस तरह से आप देखेंगे कि जैसे-जैसे आपका अभ्यास बढता जायेगा वैसे – वैसे आखे बंद करने के बाद माता दुर्गा का चित्र ज्यादा समय के लिये आपके सामने टिकना शुरु हो जायेगा. बस यही आपको चाहिये. जब आपका अभ्यास २१ से २५ दिन का हो जाय तो आप देखेंगे कि वह मुर्ती या चित्र आपकी आखो के सामने २ से ३ मिनट तक टिकना शुरु हो जायेगा.

याद रखे ये चित्र या मुर्ती शुरुवात मे सिर्फ कुछ सेकेंड के लिये ही आपके आखो के सामने दिखाई देगा. लेकिन जब २ से ३ मिनट तक दिखाई देने लगे तो यह मान कर चलिये कि आपने बहुत ही अच्छा अभ्यास किया है. ऐसा करने से माता दुर्गा की जो खासियत है, या जो गुण है वह मनोवैज्ञानिक रूप से आपके अंदर आने शुरु हो जाते है. यानी आपकी बात-चीत का प्रभाव दूसरे होना शुरु हो जाता है, आपके चेहरे पर तेज आना शुरु हो जाता है. आप जिससे भी मिलेगे उसे आप प्रभावित कर देंगे.  यह अभ्यास आप रोज करते रहे.

उपयोग कैसे करे

किसी भी कार्य के लिये जाते है तो १ मिनट तक दुर्गा मन्त्र “ॐ दुं दुर्गाये नमः” का उच्चारण करे और माता दुर्गा का मानस ध्यान कर अपनी मनोकामना अपने मन मे करे और जाये.

अब कुछ जरूरी बाते….

  • पूर्ण श्रद्धा होने पर ही दुर्गा मानस ध्यान की विधि को अपनाये

  • इस अभ्यास मे जैसे-जैसे सफलता मिलती जायेगी वैसे-वैसे आपका स्वभाव मधुर होता चला जाना चाहिये

  • आपके स्वभाव मे घमंड आते ही इस अभ्यास का असर खत्म होना शुरु हो जाता है

  • कोई आपको बला-बुरा या गाली भी दे तो अपना नियंत्रण न खोये.

  • अपने विचार हमेशा पवित्र रखे.

  • इस अभ्यास के द्वारा आप दूसरे की भी मदत कर सकते है.

  • इस अभ्यास मे दिक्षा की जरूरत नही होती.

यहा एक पृश्न उठता है कि जब हम जब हम दुर्गा पूजा करते ही है तो दुर्गा मानस ध्यान की क्या जरूरत है. तो इसका उत्तर यह है कि जब आप पूजा करते है तब आना मेका मन फिर भी चंचल रहता है, लेकिन जब आप मानस ध्यान करते है तब आप पूरी तरह से डूब जाते है इसलिये पुजा की तुलना मे मानस ध्यान १० गुना ज्यादा प्रभाव देता है.

आशा है आप इन विधियो को अपनायेंगे और अपने जीवन मे सफल होगे. इसलिये पूर्ण श्रद्धा के साथ अभ्यास करे.

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