पुजा – ध्यान- या साधना करते समय सुरक्षा

पुजा – ध्यान- या साधना करते समय अपनी सुरक्षा अवश्य कर ले

आज हम जानेगे कि पूजा- ध्यान या साधना करते समय अपनी सुरक्षा कैसे करे. आप कहेंगे कि सुरक्षा की क्या जरूरत है. मै तो वर्षो से ध्यान कर रहा हू, मुझे तो कुछ भी नुकसान नही हुआ.
यहा मै यह कहना चाहता हु कि पूजा करना या पूजा मे डूब जाना दोनो मे अलग अलग प्रभाव होता है, पूजा करना सिर्फ दिखावा है पूजा मे डूब जाना या पूजा मे लीन हो जाना ही सफलता की निशानी है.जब पूजा मे आप डूब जाते है तब आपका शरीर और मन अलग होना शुरु हो जाता है और आपका शरीर संवेदनशील हो जाता है. देखने की क्षमता, सुनने की क्षमता, सूघने की क्षमता तथा महसूस करने की क्षमता बढ जाती है. ऐसे समय मे एक हल्की सी आवाज से ही आपके कान खडे हो जाते है. पूरे शरीर मे सिहरन दौड जाती है. या शरीर मे कपकपी होनी शुरु हो जाती है. एकांत कमरे मे आप पूजा कर रहे है तो ये अनुभव ज्यादा ही होते है.
इसी तरह के अनुभव ध्यान या साधना करते समय भी होते है…… पूजा की तुलना मे…. ध्यान करते समय या साधना करते समय इस तरह के अनुभव ज्यादा ही होते है…. ऐसे बहुत से लोग है जो कहते है कि साधना करते समय बहुत डर लग रहा है,,,,, ऐसा लगता है कि कोई वहा पर है. कहने का अर्थ यही है कि आपका शरीर साधना करते समय संवेदनशील हो जाता है ऐसे समय हल्की सा आवाज को भी आपका शरीर महसूस कर लेता है.

इसके अलावा आपका शरीर संवेदनशील होने की वजह से नकारात्मक शक्तिया जल्दी ही आकर्षित हो जाती है. यह अक्सर पूजा करने वाले या ध्यान करने वाले ब्यक्ति पर कम तथा साधना करने वाले ब्यक्ति पर ज्यादा होता है.

  1. ऐसे समय मे ब्यक्ति का मानसिक संतुलन भी बिगड सकता है.
  2. इसलिये जब भी आप पूजा- ध्यान या कोई साधना कर रहे है तो कुछ विधी अपनाये फिर पुजा- ध्यान या साधना की शुरुवात करे.
  3. जिन्होने कुंडलिनी का अभ्यास किया है वे पुजा- ध्यान या साधना के पहले मणिपुर चक्र क्लीनिंग व मणिपुर चक्र त्राटक करे.
  4. मणिपुर चक्र क्लीनिंग और मणिपुर चक्र त्राटक कैसे करे इसका लिंक नीचे डिस्क्रिप्शन मे दिया गया है.
  5. पुजा- ध्यान या साधना के पहले अग्नि बीज मन्त्र या मणिपुर बीज मन्त्र “लं” का १०८ बार उच्चारण करे
  6. पुजा- ध्यान या साधना के पहले अपने मणिपुर चक्र पर यानी छाती के नीचे या नाभी के ऊपर दोनो हाथ रखकर आख बन्द कर ले और नीली रोशनी मणिपुर चक्र मे जा रही है… ऐसे भावना करे.

इस तरह से पुजा करते समय , ध्यान करते समय या कोई साधना करते समय आगर आप इन इन नियमो का पालन करते है तो हर तरह से सुरक्षा मिलती है तथा पूजा – ध्यान या साधना करते समय आने वाले विघ्न समाप्त होने लगते है.

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